दोस्तों आज हम इस ब्लॉग के माध्यम से ये समझने की कोशिश करेंगे कि क्यों महत्वपूर्ण है टनकपुर-जौलजीबी सड़क का जल्द निर्माण और इससे भविष्य में क्या फायदे है।
1:राष्ट्रीय सुरक्षा
सीमा सड़क संगठन (BRO) के तहत बन रही यह बहुप्रतीक्षित, सामरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण सड़क टनकपुर से जौलजीबी 131 किलोमीटर इंडो-नेपाल बॉर्डर पर बन रही हैं। हालाँकि पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र की स्थिति साफ होने तक टनकपुर से रूपालीगाड़ तक 55 किलोमीटर का कार्य होना हैं। जिसका निर्माण कार्य सीम-चूका 28 किलोमीटर तक पहुँचा हैं। इस सड़क के निर्माण कार्य का विवादो से पुराना नाता रहा है हालांकि हाल ही में न्यायालय द्वारा निर्माण कार्य बहाली करने के पक्ष में फैसला आया है। ब्लॉग के माध्यम से सभी से अपील एकजुट होये देश की सुरक्षा से उपर कुछ नही है। क्षेत्रिय अर्थव्यवस्था से ऊपर राष्ट्रीय सुरक्षा है। वर्तमान में भारत के चीन और नेपाल से संबंध बेहद तल्ख़ और तनावपूर्ण होते जा रहे हैं सीमा पर गतिविधिया बढ़ती जा रही है ताजा उदाहरण हमारे धारचूला के समीप लिम्पियाधुरा-कालापानी-लिपुलेख क्षेत्र विवाद आज नेपाल भारतीय क्षेत्र को अपना बता रहा है एक तरफ़ चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों से बाज नही आ रहा हैं चीन नेपाल को ढाल बनाकर हमारे देश के विरुद्ध सडयंत्र रच रहा है नेपाल मे निवेश कर बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचागत परियोजनाओ के साथ नेपाल के भारतीय के सीमावर्ती इलाकों मे रोड नेटवर्क और अपना इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर रहा है इसका उदाहरण आप तल्लदेश के ग्राम बचकोट और पोलप से नेपाल की पहाड़ियों को देख सकते हैं जहाँ आज सडको का जाल बिछ चुका हैं यह वही नेपाल का क्षेत्र है जहाँ के लोग वर्षो पूर्व पैदल नदी पार कर हमारे क्षेत्र से गुड़ नमक चीनी इत्यादि मूलभूत जरूरत की चीजें ले जाते थे। उपरोक्त से अंदाजा लगाया जा सकता है एक दशक पूर्व अंत्यंत पिछड़ा बीहड़ नेपाली क्षेत्र आज चीन की जुगलबंदी से विकसित किया जा रहा है आखिर क्या मंशा है चीन नेेेपाल की।
दूसरी ओर लेह लदाख गलवान घाटी, पेंगांग झील विवाद, डोकलांम और अरुणाचल से अक्साई चीन संकट। वर्तमान मे इस सड़क का जल्द से जल्द बनना बेहद महत्वपूर्ण है। ताकि देश की संप्रभुता की रक्षा , सीमाओ को चाक-चोबंद, गैर- कानूनी गतिविधियों को रोकी जा सके इसी क्रम में भारत सरकार सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास पर दे रही है जिसका सभी लोगो को समर्थन करना चाहिए। तवाघाट-लिपुलेख (धारचूला) सड़क के लिंक होने से आज भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिये सीमा की निगहबानी आसान हो गयी हैं। भविष्य मे टनकपुर जौलजीवी सड़क से नेपाल सीमा पिथौरागढ़ में चीन सीमा में पेट्रोलिंग आसान होगी। भारतीय सुरक्षाबल नियमित गश्त, आसानी से आवागमन कर सकेंगे। यह मोटर मार्ग हमारे देश की रक्षा तैयारियो का हिस्सा है सरकार का ध्यान बॉर्डर कनेक्टिविटी में वृद्धि और सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास तरफ है।
2: सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास
कुमाऊं के दूसरे द्वार के रूप में प्रसिद्ध टनकपुर से बहु प्रतीक्षित टनकपुर जौलजीवी मोटरमार्ग के कार्य होने से चम्पावत व पिथौरागढ़ जिले के गांवों के लोगों को कई दशकों से मुख्य सड़क से जोड़ने का सपना आखिरकर सच होने को है।इस सड़क के पूरा बनने पर पिथौरागढ़ तक का सफर आधा हो जाएगा।वहीं, पंचेश्वर से लगी शारदा और काली नदी के किनारे बनने वाली इस सड़क से चम्पावत ओर पिथौरागढ़ जिले के दुरस्त गांव के कास्तकार मुख्य सड़क से जुड़ने के सपने को पूरा कर पाएंगे।टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग के निर्माण को लेकर वन विभाग ने गतिविधि तेज कर कर दी है। महाकाली के किनारे बनने वाली इस सड़क को केंद्र सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना के निर्माण से सीमावर्ती गाव फिर से आबाद होंगे। पलायन का दंश झेल रहे तल्लदेश से जौलजीवी तक के क्षेत्र का कायाकल्प होगा फिर खुशहाली आएगी। रोजगार के अपार विकल्प पैदा होंगे। क्षेत्र को टूरिज्म स्पॉट बनाने में यह सड़क महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है। यातायात आवागमन सुगम होगा। शिक्षा क्षेत्र मे सुधार होगा।
उपयुक्त तथ्यों को देखते हुए समय की मांग हैं कि सीमाओ पर लम्बित पड़ी योजनाओं को कोर्ट कचहरी में पहुचाने की जगह जल्द पूरा किये जाने की ओर त्वरित और उचित कदम उठाना चाहिए। आज सरकार भी समझ चुकी नेपाल हिंदी चीनी भाई भाई का नारा व्यर्थ था। हमारी सरकार डिप्लोमेटिक रिश्तो को बनाये रखने के साथ सभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओ की तरफ ध्यान बढ़ा रही है बॉर्डरो पर पोस्टो की संख्यायो में इजाफा किया जा रहा है। राष्ट्र सुरक्षा सर्वोपरि है।
धन्यवाद
जय भारत
#INDO #NEPAL #BORDER #JAULJIBI #ROAD #CHAMPAWAT #UTTRAKHAND
1:राष्ट्रीय सुरक्षा
सीमा सड़क संगठन (BRO) के तहत बन रही यह बहुप्रतीक्षित, सामरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण सड़क टनकपुर से जौलजीबी 131 किलोमीटर इंडो-नेपाल बॉर्डर पर बन रही हैं। हालाँकि पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र की स्थिति साफ होने तक टनकपुर से रूपालीगाड़ तक 55 किलोमीटर का कार्य होना हैं। जिसका निर्माण कार्य सीम-चूका 28 किलोमीटर तक पहुँचा हैं। इस सड़क के निर्माण कार्य का विवादो से पुराना नाता रहा है हालांकि हाल ही में न्यायालय द्वारा निर्माण कार्य बहाली करने के पक्ष में फैसला आया है। ब्लॉग के माध्यम से सभी से अपील एकजुट होये देश की सुरक्षा से उपर कुछ नही है। क्षेत्रिय अर्थव्यवस्था से ऊपर राष्ट्रीय सुरक्षा है। वर्तमान में भारत के चीन और नेपाल से संबंध बेहद तल्ख़ और तनावपूर्ण होते जा रहे हैं सीमा पर गतिविधिया बढ़ती जा रही है ताजा उदाहरण हमारे धारचूला के समीप लिम्पियाधुरा-कालापानी-लिपुलेख क्षेत्र विवाद आज नेपाल भारतीय क्षेत्र को अपना बता रहा है एक तरफ़ चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों से बाज नही आ रहा हैं चीन नेपाल को ढाल बनाकर हमारे देश के विरुद्ध सडयंत्र रच रहा है नेपाल मे निवेश कर बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचागत परियोजनाओ के साथ नेपाल के भारतीय के सीमावर्ती इलाकों मे रोड नेटवर्क और अपना इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर रहा है इसका उदाहरण आप तल्लदेश के ग्राम बचकोट और पोलप से नेपाल की पहाड़ियों को देख सकते हैं जहाँ आज सडको का जाल बिछ चुका हैं यह वही नेपाल का क्षेत्र है जहाँ के लोग वर्षो पूर्व पैदल नदी पार कर हमारे क्षेत्र से गुड़ नमक चीनी इत्यादि मूलभूत जरूरत की चीजें ले जाते थे। उपरोक्त से अंदाजा लगाया जा सकता है एक दशक पूर्व अंत्यंत पिछड़ा बीहड़ नेपाली क्षेत्र आज चीन की जुगलबंदी से विकसित किया जा रहा है आखिर क्या मंशा है चीन नेेेपाल की।
दूसरी ओर लेह लदाख गलवान घाटी, पेंगांग झील विवाद, डोकलांम और अरुणाचल से अक्साई चीन संकट। वर्तमान मे इस सड़क का जल्द से जल्द बनना बेहद महत्वपूर्ण है। ताकि देश की संप्रभुता की रक्षा , सीमाओ को चाक-चोबंद, गैर- कानूनी गतिविधियों को रोकी जा सके इसी क्रम में भारत सरकार सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास पर दे रही है जिसका सभी लोगो को समर्थन करना चाहिए। तवाघाट-लिपुलेख (धारचूला) सड़क के लिंक होने से आज भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिये सीमा की निगहबानी आसान हो गयी हैं। भविष्य मे टनकपुर जौलजीवी सड़क से नेपाल सीमा पिथौरागढ़ में चीन सीमा में पेट्रोलिंग आसान होगी। भारतीय सुरक्षाबल नियमित गश्त, आसानी से आवागमन कर सकेंगे। यह मोटर मार्ग हमारे देश की रक्षा तैयारियो का हिस्सा है सरकार का ध्यान बॉर्डर कनेक्टिविटी में वृद्धि और सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास तरफ है।
2: सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास
कुमाऊं के दूसरे द्वार के रूप में प्रसिद्ध टनकपुर से बहु प्रतीक्षित टनकपुर जौलजीवी मोटरमार्ग के कार्य होने से चम्पावत व पिथौरागढ़ जिले के गांवों के लोगों को कई दशकों से मुख्य सड़क से जोड़ने का सपना आखिरकर सच होने को है।इस सड़क के पूरा बनने पर पिथौरागढ़ तक का सफर आधा हो जाएगा।वहीं, पंचेश्वर से लगी शारदा और काली नदी के किनारे बनने वाली इस सड़क से चम्पावत ओर पिथौरागढ़ जिले के दुरस्त गांव के कास्तकार मुख्य सड़क से जुड़ने के सपने को पूरा कर पाएंगे।टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग के निर्माण को लेकर वन विभाग ने गतिविधि तेज कर कर दी है। महाकाली के किनारे बनने वाली इस सड़क को केंद्र सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना के निर्माण से सीमावर्ती गाव फिर से आबाद होंगे। पलायन का दंश झेल रहे तल्लदेश से जौलजीवी तक के क्षेत्र का कायाकल्प होगा फिर खुशहाली आएगी। रोजगार के अपार विकल्प पैदा होंगे। क्षेत्र को टूरिज्म स्पॉट बनाने में यह सड़क महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है। यातायात आवागमन सुगम होगा। शिक्षा क्षेत्र मे सुधार होगा।
उपयुक्त तथ्यों को देखते हुए समय की मांग हैं कि सीमाओ पर लम्बित पड़ी योजनाओं को कोर्ट कचहरी में पहुचाने की जगह जल्द पूरा किये जाने की ओर त्वरित और उचित कदम उठाना चाहिए। आज सरकार भी समझ चुकी नेपाल हिंदी चीनी भाई भाई का नारा व्यर्थ था। हमारी सरकार डिप्लोमेटिक रिश्तो को बनाये रखने के साथ सभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओ की तरफ ध्यान बढ़ा रही है बॉर्डरो पर पोस्टो की संख्यायो में इजाफा किया जा रहा है। राष्ट्र सुरक्षा सर्वोपरि है।
धन्यवाद
जय भारत
#INDO #NEPAL #BORDER #JAULJIBI #ROAD #CHAMPAWAT #UTTRAKHAND


बहुत ही शानदार
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